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माईसेम सीमेट


नरसिंहगढ़ एक छोटा सा गांव है जो देा नदियों कोपरा एवं सुनार के किनारे बसा हैं यह दमोह से 20 कि.मी. दूर दमोह छतरपुर राजमार्ग न0 37 पर है। इसका नाम यहाँ के प्राचीन राजा नरसिंह के नाम पर नरसिंहगढ़ पड़ा। मध्य भारत के इतिहास में नरसिंहगढ का बहुत महत्तव था। क्यो कि यह उत्तर भारत से मध्य भारत के बीच एक दरवाजे का कार्य करता था। मुगलों ने यहाँ आक्रमण किया और एक भयानक लड़ाई के पश्चात् इस पर कब्जा कर लिया तथा इसका नाम नरसिंहगढ़ से नसरथगढ़ कर दिया। मराठों ने आक्रमण कर इसे मुगलों से हड़प लिया और पुनः इसका असली नाम फिर से नरसिंहगढ़ कर दिया। अंगे्रजो ने मराठो से इसे हासिल किया। नरसिंहगढ में एक किला था। जिसके अवशेष आज भी मूक गवाह की तरह नरसिंगढ़ के इतिहास की गवाही लोगो को देते है। यहाँ की वर्तमान जनसंख्या लगभग 7000 है और लोगो का मुख्य व्यवसाय कृषि है। यहाँ की जलवायु उष्ण है तथा यहाँ समान्य वर्षा होती है यहाँ चारो तरफ चूना पत्थर पाया जाता है। अतः यहाँ  एक सीमेंट फेक्टरी है जिस पर हेदल वर्ग सीमेंट गु्रप का अधिकार है।
कम्पनी अपना व्यवसाय मध्य भारत में दमोह (म0प्र0) झांसी (यू0पी0) एंव दक्षिण में आमसनदरा (कर्नाटक) में संचालित करती है। कम्पनी ने 2013 में ब्राउन फील्ड के विस्तार एंव मध्यभारत में उपलब्ध सुविधायों के द्वारा अपनी क्षमता में प्रति वर्ष 5.4 मिलियन सो की बढ़ातरी की है।
उत्पादन की नई क्षमता ने कंपनी को मध्य भारत म0प्र0, उ0प्र0 बिहार हरियाणा एंव उत्राखण्ड में अपने शेयरो को बढ़ाने के योग्य बनाया। कंपनी ने अपने ब्रान्ड के लिये नया नाम लिखा माइसेम सीमेंट दिया और उत्पादन की गुणवत्ता ओर सामुहिक विक्रय के प्रयासों से अपने उत्पादन ब्रांड की स्थिति मजबूत की।


आसपास के क्षेत्र के लोगो के लिए माइसेम सीमेन्ट फैक्ट्री एक वरदान है। यह लोगो को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोगो को रोजगार प्रदान करती है। माइसेम सीमेट फैक्ट्री ने प्रबंधन के मूल सिद्धातों को ध्यान में रखते हुए अपने कर्मचारियों की सुविधा के लिए एक बेहतरीन टाउनशिप का निर्माण किया है जहाँ सभी आधुनिक सुविधाऐं जैसे- आवसीय परिसर, सहकारी भंडार, डेरी, सी.बी.एस.ई से संबधता प्राप्त इंग्लिश मीडियम स्कूल, हॉस्पिटल, केबल टीव्ही कनेक्शन, मनोरंजन क्लब इत्यादि उपलब्ध हैं। कम्पनी द्वारा नरसिंहगढ के बंजर और पथरीले भू-भाग पर परिसर के आसपास सघन वृक्षारोपण के कारण दूर से यह स्थान मरुस्थल में मरुद्यान की तरह दिखाई देता है।

 

प्रशासनिक भवन



माईसेम सीमेंट फैक्टरी का एक अलग प्रशासनिक भवन है जिसमे कई व्यवसायिक विभाग संचालित हेाते है। प्रशासनिक भवन अपनी अलग बनावट एवं स्थापत्य के लिए न केवल दमोह जिले में बल्कि सारे सागर संभाग में जाना जाता है। यह भारत की एकता और सांस्कृतिक का प्रतीक है। बडे-बडे ओर शानदार कमरो में आधुनिक ऑफिस कार्य आधुनिक सूचना तकनीक और आसान पंहुच समाहित है।

 

पेय जल


माईसेम सीमेटं फैक्टरी के आने के पहले नरसिंहगढ में कोई भी बढ़ी दुकान नहीं थी। आस -पास सिर्फ छोटी छोटी पान और चाय की दुकाने थी जहाँ ग्राहकों को तब ही एक गिलास पानी पिलाया जाता था जब वो चाय पीने का आर्डर देते थें। नरसिंहगढ में पीने के पानी की बहुत कमी थी। माइसेम सीमेंट फैक्टरी के अस्तित्व में आने के बाद यहाँ सारे शहर को पानी उपलब्ध कराया गया। गांव के सभी परिवारों को पीने का पानी नल, हैन्डपंप, की सुविधा के साथ-साथ जगह जगह सार्वजानिक नल पेयजल की भी व्यवस्था की गई।

 

मंदिर



कंपनी ने परिसर के अंदर हनुमार मंदिर और शानदार राधा-कृष्ण मंदिर बनवाया है जहां शुभ अवसरों पर विद्वान पंडितो द्वारा व्याख्यान होते हैं। टाउनशिप परिसर के मंदिर साल भर सभी के लिए खुले रहते है तथा गांव के लोग यहां भारी संख्या में दर्शनों और पूजा पाठ के लिए आते रहते है। शहर में एक प्राचीन राम मंदिर था जो अंगे्रजो के समय से उपेक्षित और जीणक्षीण अवस्था में था। कम्पनी ने उसका जीर्णोद्धार किया और आज वह क्षेत्र के सबसे सुन्दर मंदिरों में शामिल है। कंपनी ने न सिर्फ यह नरसिंहगढ़ बल्कि आस-पास के गांवो के मंदिरो के जीर्णोद्धार एवं देख रेख का काम भी करवा रही है।

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