Back Button

 

 दमोह जिले के अंतर्गत राज्य स्तर के पुरातत्व

 
::चित्राखेड़ा (छितरा खेड़ा)::
दमोह जिले की तहसील परिसीमन में ही बादकपुर से बलारपुर मार्ग पर सात मंदिर समूह के ढेरों का सग्रहण स्थल मौजूद है। चित्राखेड़ा शासकीय विद्यालय के सम्मुख मंदिर समूह के ढेर विद्यमान है। मंदिर वास्तु में प्रयुक्त प्रस्तर खण्ड़ों अनंत से शैब महाबलम्बिलयों के मंदिर बने रहे होगे। कलचुरि शासकों के कार्यकाल के प्रतीत होते है। मूलतः इन प्रस्तर खण्ड़ समूहों मे सरस्वती, शिवसिद्वल चन्द्रशिला के अंकन प्राप्त है। मंदिर समूह राज्य पुरातत्व अभिलेखागार तथा संग्रहालय इकाई का संरक्षित स्मारक है।

 
चित्राखेड़ा (छितरा खेड़ा)
 
चित्राखेड़ा (छितरा खेड़ा)
 
चित्राखेड़ा (छितरा खेड़ा)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


::रूकमणि मठ - कुण्डलपुर::
दमोह जिले की पटेरा तहसील स्थित दमोह से सुगम सड़क मार्ग द्वारा 37 कि.मी. की दूरी पर स्थित हैं। इसकी भौगोलिक दषा 23’ उत्तरी अक्षांश तथा 79’40 पूर्वी देशांश पर अवस्थित हैं। मठ पूर्णतः सुरक्षित हैं एवं जिसमें राज्य पुरातत्व इकाई का चैकीदार/के.टे. कार्यरत भी हैं। इस मंदिर/मठ में देवी देवताओं का अंकन नहीं हैं। प्रस्तर स्तम्भ खण्ड सादे हैं। मठ वर्गाकार आकृति में सपाट स्तम्भों पर आधारित वास्तु विन्यास हैं । मठ राज्य पुरातत्व अभिलेखागार तथा संग्रहालय विभाग का संरक्षित स्मारक हैं।

 

 
चित्राखेड़ा (छितरा खेड़ा)
 
चित्राखेड़ा (छितरा खेड़ा)
 
चित्राखेड़ा (छितरा खेड़ा)
 
चित्राखेड़ा (छितरा खेड़ा)
 
चित्राखेड़ा (छितरा खेड़ा)
 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


::रानी दमयंती (पुरातत्व संग्रहालय) दमोह::
दमोह जिला मुख्यालय पर ही शहर के मध्य कोतवाली के सम्मुख स्थित ऐतिहासिक पुरातात्विक राज्य पुरातत्व तथा अभिलेखाकार का संरक्षित स्मारक है। इस ऐताहासिक इमारत में 25 अगस्त 1989 को जिला पुरातत्व संग्रहालय की शुरूआत हुई। विगत् 25 वर्षों की संग्रहालय के विकास की अवधारणा को फलीभूत करता।

 
रानी दमयंती (पुरातत्व संग्रहालय) दमोह
 
रानी दमयंती (पुरातत्व संग्रहालय) दमोह
 
रानी दमयंती (पुरातत्व संग्रहालय) दमोह
 
रानी दमयंती (पुरातत्व संग्रहालय) दमोह
 
रानी दमयंती (पुरातत्व संग्रहालय) दमोह
 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


::पुराना (प्रार्थनाघर) दमोह::
दमोह जिला मुख्यालय पर जिलाध्यक्ष (कलेक्टर) आवास मार्ग पर स्थित अंग्रेजों का ’’एग्लिकन’’ चर्च प्रार्थनाघर मौजूद है, जो राज्य पुरातत्व अभिलेखाकार तथा संग्रहालय विभाग का संरक्षित स्मारक है वहां पर एक के.टे. भी मौजूद है। अंग्रेज लोग चूंकि राजा को मानते थे। अतः वह कैथोलिक चर्च में न जाकर अपने बनाए एग्लिकल चर्च में प्रार्थना करने हेतु इकट्ठे होते थे। इसीलिए इसको सामान्यतः लोग गिरिजाघर कहते है।

 
पुराना (प्रार्थनाघर) दमोह
 
पुराना (प्रार्थनाघर) दमोह
 
पुराना (प्रार्थनाघर) दमोह
 
पुराना (प्रार्थनाघर) दमोह
 
पुराना (प्रार्थनाघर) दमोह

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

           

 

 

 

 

Scroll Top