Back Button दमोह जिले के अंतर्गत नवीन प्रस्तावित पुरातत्व

 
::खारी देवरी::
दमोह जिले की तेन्दूखेड़ा तहसील मुख्यायल से 40 किमी. दूरी पर अवस्थित ग्राम में प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर स्वरूप निर्मित मंदिर वास्तु के अवशेषों का ढेर शासकीय प्राथमिक शाला के सम्मुख मौजूद है। जिनमें आमलक मंदिर शिखर  भाग चैकोट वितान के अनेक प्रस्तर खण्ड एवं मंदिर भाग के स्तम्भ खण्ड़ों की बहुलता है समीप स्थित विद्यालय के पास ही अन्य प्रतिमाओं के महत्वपूर्ण अंकनों का प्रचुर में मडा के आस पास तथा स्थानीय व्यक्तियों द्वारा स्कूल के बाजू की गुबार (गोबर संग्रहण) जगह पर भी प्रतिमाए दबी पडी हो सकती है। ग्राम प्रवेश पर ही प्राचीन बावडी पर्याप्त जल का उन्नत स्त्रोत आज भी है। उक्त स्थल असंरक्षित स्थल है।
 

 
खारी देवरी
 
खारी देवरी
 
खारी देवरी
 
खारी देवरी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

::मोहड::
दमोह जिले की तेन्दूखेड़ा तहसील में ही मोहड़ नाम का प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर की श्रेणी में रखे जाने योग्य खेतों के मध्य बस्ती के दूसरे मुख्य रास्ते में ही 05 मंदिर समूह के ढेर जिसमें चार छोटे-छोटे समूह तथा एक मंदिर समूह वृहद आकार का जिसमें स्तम्भ खण्ड एवं ऊपरी विहान युक्त गुम्बद स्तम्भ खण्ड विषेष अलंकरण युक्त दीवालय यहा मौजूद है उक्त स्थल आसंरक्षित है। स्थल विशेष को संरक्षित कर विशेष शोध परख अध्ययन की विषय वस्तु का आगामी कार्य होगा। मदिर प्रस्तर खण्ड़ो को मंदिर निर्माण के पुर्नः निर्माण पद्विति से पुनः मूल स्वरूप में लाया जा सकता है।


 
मोहड
 
मोहड
 
मोहड
 
मोहड

 
मोहड
 
मोहड
 
मोहड
 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


::वंशीपुर::
दमोह जिले की जबेरा तहसील अंतर्गत तिगरा डेलनखेड़ा मार्ग पर स्थल प्राचीनतम् धरोहर है। जिसे संरक्षित किया जाना नितांत आवश्यक है जिला मुख्यालय से लगभग 45 किमी. दूर वंशीपुर ग्राम में दांयी पहाड़ी के ऊपर निर्मित 05 स्तम्भ खण्ड़ों के अवषेष मिलते हे। जिनमें एक मंदिर/देवालय बौद्व भिक्षु बिहार का होना तय करता है। मंदिर वास्तु विन्यास को सूक्ष्मता से बौद्व बिहार होना प्रतीत कराते है। संभवतः बौद्व बिहार बौद्व भिक्षुओं के रहने की जगह प्रथमतः प्रतीत होते है।


 
वंशीपुर
 
वंशीपुर
 
वंशीपुर
 
वंशीपुर

 
वंशीपुर
 
वंशीपुर
 
वंशीपुर
 
वंशीपुर

 

 

 

 

 

 

 

 

 


::दौनी::
दमोह जबलपुर मार्ग पर सिंग्रामपुर से लगभग 24 किमी. की दूरी पर धने वन प्रक्षेत्र के मध्य स्थित है। दमोह जिले की वृहद पुरातात्विक स्मारक स्थल के रूप में परिगणित है। इस स्थल को पुरातत्व विभाग द्वारा आवश्यक रूप से अद्यिगृहित किया जाना चाहिएं। यहां पर लगभग 09 मंदिर समूह के ढेर लगे हुए है। स्थानीय लोग इन समूहों/ढेरों को मढा कहते है। मंदिर ढेर में यंत्र तंत्र स्तम्भ खण्ड आमलक गज................. आदि अनेक महत्वपूर्ण अंकनों का संग्रह यहा मौजूद है। पुरातात्विक धरोहर संरक्षण सुरक्षित करने हेतु आवश्यक प्रयास किया नितांत आवश्यक है। अभी कोई संरक्षण नही है।


 
दौनी
 
दौनी
 
दौनी
 
दौनी
 
दौनी
 
दौनी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 





::दौनी अलौनी दीवार::
स्थल विशेष  दमोह जबलपुर मार्ग पर भैसाघाट पहाडी मार्ग द्वारा सिंग्रामपुर से लगभग 20 किमी. की दूरी पर स्थित है दौनी ग्राम से पूर्व मुख्य मार्ग पर चौड़ी चपटी ईटों की वृहद दीवार निर्माण के संकेत मिलते हे। यह दीवार 20-25 चौड़ी है। ऊचाई भी लगभग 12-15 फीड़ होगी। दीवार में प्रयुक्त ईट का माप 29´20´6 सेण्टीमीटर है। मूलतः यह दीवार सिंगोरगढ़ किले की रक्षा प्राचीर का हिस्सा होगा। स्थल विशेष से सिंगोरगढ़ किले की दूरी लगभग 5-7 किमी. की दूरी पर ही है। अतः यह दीवार सिंगोरगढ़ किले की सुरक्षा प्राचीर (दीवार) है।


 
दौनी अलौनी दीवार
 
दौनी अलौनी दीवार
 
दौनी अलौनी दीवार
 
दौनी अलौनी दीवार

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


::राजनगर किला (दमोह)::
दमोह जिला मुख्यालय पर ही पॉलिटेक्निक महाविद्यालय के करीब वाले रास्ते से राजनगर रैयतवाड़ी क्षेत्र में शहर से 02 किलोमीटर की दूरी पर स्थित राजनगर किले के रूप में पहचान निरूपित करता यह स्मारक प्रक्षेत्र पुरातात्विक या किला की पूर्णता के अकंन प्रतीत नही कराता है ? चूंकि मूलतः ऊचांई वाले प्रक्षेत्रमें अवस्थित चार दीवारी, परकोटे से संरक्षित प्रस्तर खण्ड़ जिनमें चिनाई नही है, प्रस्तरों का सुव्यवस्थित संचयन, जिनमें चारों तरफ गुम्बदों जैसे आकार कोई स्पष्ट संकेत निरूपित नही करते है। इस स्थान की सूक्ष्मता से परीक्षण हेतु वरिष्ठ पुरातत्वेताओं का परमर्श आवश्यक होगा।

 
राजनगर किला (दमोह)
 
राजनगर किला (दमोह)
 
राजनगर किला (दमोह)
 
राजनगर किला (दमोह)
 
राजनगर किला (दमोह)
 
राजनगर किला (दमोह)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

::पण्ढ़रीनाथ मंदिर (पथरिया)::
दमोह जिला मुख्यालय से सुगम सड़क मार्ग द्वारा बीना-कटनी रेलमार्ग से 27 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। बस्ती गढ़ाकोटा नाका मार्ग पर दांयी ओर स्थित मंदिर/देवालय मराठाकालीन स्थापत्य का सुव्यस्थित बुन्देलकला शैली मंदिर जिसमें भगवान पढ़रीनाथ (श्री कृष्ण राधिका स्वरूप) विराजित है। इस मंदिर वास्तु में गर्भगृह, प्रदक्षिणा पथ तथा सभा मण्डप मौजूद है। सीढ़ीयां भी मंदिर के ऊपरी भाग में जाने के लिए जीर्ण शीर्ण अवस्था में है चूंकि स्थापत्य ऐताहासिक धरोहर की श्रेणी में रखने योग्य है। अतः पुरातत्व विभाग की राजकीय इकाई द्वारा इसे संरक्षण में लिए जाने का प्रयास किया जाना चाहिए। मंदिर मूलतः विगत् पांच दशक से किसी निगरानी या अधिपत्य में नही है। जिस कारण दिनोदिन धरोहर की विलुप्तता समाप्त होने की स्थिति हो सकती है। अतः संरक्षण के प्रयास लाजिमी है।

 
पण्ढ़रीनाथ मंदिर (पथरिया)
 
पण्ढ़रीनाथ मंदिर (पथरिया)
 
पण्ढ़रीनाथ मंदिर (पथरिया)

 

 

 

 

 

 

 
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